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चीन को स्पष्ट संदेश है एप पर पाबंदी – IMPRI Impact and Policy Research Institute

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चीन को स्पष्ट संदेश है एप पर पाबंदी - IMPRI Impact and Policy Research Institute

अनिल त्रिगुणायत

भारत द्वारा चीनी एप पर पाबंदी से चीन की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अच्छा-खासा नुकसान होगा क्योंकि इनके लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है.

भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण फिर 53 चीनी एप पर पाबंदी लगायी है. पिछले डेढ़ साल में 300 से अधिक ऐसे एप बंद किये गये हैं, जिनकी पृष्ठभूमि चीन से संबंधित है. ये एप जिस प्रकार से यूजर के डाटा को संग्रहित करते हैं, उससे भारत की सुरक्षा को खतरा पहुंच सकता है. सरकार की यह कार्रवाई बेहद अहम है क्योंकि एप डाउनलोड और इंस्टॉल करने के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है.

रिपोर्टों की मानें, तो पिछले साल हमारे देश में 25 अरब से अधिक डाउनलोड हुए हैं. जाहिर है कि ये पाबंदियां चीन की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है. एक प्रकार से इस मसले को क्षेत्रीय जटिलता के हिसाब से देखा जा सकता है. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उसकी आक्रामकता और गलवान घाटी में उसके हमलावर होने के बावजूद चीन यह चाहता है कि आर्थिक संबंध सामान्य रूप से चलते रहें तथा वह राजनीतिक और सामरिक तौर पर भारत को दबाता रहे, ताकि भारत दक्षिण एशिया तक ही सीमित रहे. यह उसकी रणनीति है और इसी कारण वह हमारे पड़ोसी देशों में भी लगातार अपना वर्चस्व बढ़ा रहा है.

अब भारत के सामने यही विकल्प है कि यदि चीन राजनीतिक स्थिति को सामान्य बनाये नहीं रख सकता है, तो इसके असर अन्य क्षेत्रों पर होंगे. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अक्सर स्पष्ट रूप से कहा है कि चीनी रणनीति में अगर सुधार नहीं होता है, तो व्यापारिक गतिविधियां भी सुचारु रूप से नहीं चल सकती हैं. भारत ने इसी वजह से एप पर पाबंदी लगाने की पहल की है.

इसके अलावा, पहले चीन से आनेवाले निवेश को लेकर नियमों को कड़ा बनाया गया है. मेरी दृष्टि में ये सब अपने अधिकारों और हितों को सुरक्षित रखने के उपाय हैं. भारत इस तथ्य से भी आगाह है कि आर्थिक एवं व्यापारिक स्तर पर चीन पर हमारी निर्भरता बहुत अधिक है. इसे कम करने के प्रयास में भारत ने अनेक क्षेत्रों, विशेषकर इलेक्ट्रिकल्स, चिप निर्माण आदि, में देश के भीतर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय पहलकदमी की है ताकि आत्मनिर्भर भारत बनाने के संकल्प को साकार किया जा सके. पिछले साल उत्पादन से संबंधित प्रोत्साहन योजना भी शुरू की गयी है, जिसके उत्साहजनक परिणाम आने लगे हैं.

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव समाप्त करने के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच चौदह वार्ताएं हो चुकी हैं. इनसे कुछ लाभ हुआ है, पर उसे संतोषजनक नहीं माना जा सकता है. रूस-भारत-चीन (आरआइसी) प्रक्रिया में भारत ने भलमनसाहत में बीजिंग में आयोजित शीतकालीन ओलिंपिक को समर्थन भी किया ताकि आपसी तनाव राजनीतिक स्वरूप न ले ले.

लेकिन चीन ने उसी सैन्य अधिकारी से इस खेल आयोजन में मशाल प्रज्ज्वलित कराया, जो गलवान हमले में शामिल था. यह एक आक्रामक पैंतरा ही है क्योंकि भारत के लिए यह मामला बहुत संवेदनशील है. ऐसे में भारत को उसे यह स्पष्ट संदेश देना है कि जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति बेहतर नहीं होती है तथा चीन के रवैये में सुधार नहीं होता है, तब तक अन्य मामलों में भी भारत का रुख कठोर रहेगा.

चीन विभिन्न मसलों पर पाकिस्तान को भी समर्थन करता रहता है. हाल ही में उसने एक बार फिर पाकिस्तान के साथ साझा बयान जारी कर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने तथा भारत-विरोधी गतिविधियों को उकसाने की कोशिश की है. भारत यह नहीं भूल सकता है कि कुख्यात आतंकी सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को चीन ने अपने निषेधाधिकार से पांच बार रोका था. किसी भी द्विपक्षीय या बहुपक्षीय मंच पर वह भारतीय हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश से बाज नहीं आता है.

इस स्थिति में हमें अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सजग रहना है. आज चीन तकनीक के मामले में किसी भी देश से कमतर नहीं है. वह डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि में बहुत भारी निवेश कर रहा है. चीनी टेक कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हैं. आज डाटा सुरक्षा वैश्विक महत्व का मुद्दा बन चुका है.

हम जब किसी एप का इस्तेमाल करते हैं, तो उसमें हमारी सूचनाएं भी जमा होती हैं. अब सवाल यह उठता है कि उस डाटा का भंडारण कहां हो रहा है. अगर वह चीन में किया जा रहा है, तो निश्चित रूप से यह चिंता का विषय है. अक्सर देखा जाता है कि कई एप बिना यूजर को आगाह किये उसके डाटा को संग्रहित करते हैं.

हमें यह भी याद रखना चाहिए कि भारत लगातार साइबर हमलों और हैकिंग का निशाना बनता रहता है. संवेदनशील कार्यों से जुड़े लोग भी एप का इस्तेमाल करते हैं. सो, जो भी एप डाटा का भंडारण चीन में करते हैं या उनका संबंध चीनी कंपनियों से है या फिर वे चोरी-छुपे डाटा की सेंधमारी करते हैं या उनकी गतिविधियां संदिग्ध हैं, उन पर कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है. यह भी रेखांकित किया जाना चाहिए कि चीन स्वयं अपने यहां पश्चिम के बहुत से एप को चलने नहीं देता है या फिर उन्हें चीन की सरकार के नियमों के तहत संचालित करना पड़ता है.

भारत द्वारा चीनी एप पर पाबंदी सुरक्षा कारणों से जरूरी तो है ही, यह एक स्पष्ट संदेश भी है कि चीन को यह समझना होगा कि दोनों देशों के संबंध सामान्य नहीं हैं और वह भारत के साथ अपनी इच्छा के अनुसार व्यवहार नहीं कर सकता है. इन पाबंदियों से चीन की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अच्छा-खासा नुकसान होगा क्योंकि इन एप के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है.

हमें सामरिक रूप से चौकस रहने तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों व समूहों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिशों पर भी अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि चीन यह न समझे कि वह अपनी मनमर्जी से कुछ भी करता रहेगा. चूंकि हम अपने पड़ोसियों से संबंध-विच्छेद नहीं कर सकते हैं, इसलिए चीन के साथ बातचीत का सिलसिला भी जारी रखना चाहिए.

हमें यह भी नहीं समझना चाहिए कि लगभग 300 चीनी एप बंद कर देने से सुरक्षा चिंताएं समाप्त हो जायेंगी. अभी भी बहुत से ऐसे एप हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल चीन या अन्य कुछ देश या समूह भारत के विरुद्ध कर सकते हैं. ऐसे में हमारी सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों को मुस्तैद रहना होगा. डाटा सुरक्षा, खासकर संवेदनशील सूचनाओं के संबंध में, को लेकर कानूनी तौर पर भी ठोस पहल की दरकार है. साथ ही, सरकार और निजी उद्यमों को तकनीकी विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए. (बातचीत पर आधारित)

यह लेख पहली बार 17 फरवरी 2022 को प्रभात समाचार में प्रकाशित हुआ था चीन को स्पष्ट संदेश है एप पर पाबंदी

लेखक के बारे में

अनिल त्रिगुणायत “ईरान परमाणु सौदा और यमन में संघर्ष का भाग्य राजदूत अनिल त्रिगुनायत, (IFS सेवानिवृत्त) जॉर्डन, लीबिया और माल्टा के हाशेमाइट साम्राज्य के पूर्व राजदूत

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